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डोर रिश्तों की
यादगार बनाएँ प्रेम के हर पल को
आधुनिकता के रंग में रंगती दादी माँ
अब दुल्हे भी सीख रहे हैं 'पाक कला'
प्यारा सा है सास-बहू का रिश्ता
पिताजी अब बन गए है पापा
क्या आप करते हैं पत्नी का आदर?
परिवार की शान है बुजुर्ग
आश्रम घर की जगह नहीं ले सकते
अब मुझे माफ भी कर दो यार
एक कला है रिश्ते सहेजकर रखना
अपनेपन की कमी से थकता दिमाग
विश्वास से बँधती है प्रेम की डोर
नजरअंदाज न हो जाए कहीं राखी का लिफाफा
समझदार है मेरी बहना
बचपन की दोस्ती होती है गहरी
जहाँ छल वो रिश्ता नहीं
बिखरने न दें युवा ऊर्जा को
अब तो तारीफ कर भी दो यार
गृहस्थी सजाएँ प्यार से
अब तुम्हें बदलना होगा
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