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मंच अपना
ठाकरेजी, बस अब अति हो गई!
चूरमा बाटी संग गरम-गरम रसम!
ऑनर किलिंग' का एक रूप यह भी
मैं हिन्दी बोल रही हूँ
बहुत रोया मेरे घर का अमरूद
खतरे उठाती हमारी ये बेटियाँ
यादों में महकती दीपावली
स्मृतियों के धुँधले साये में पिताजी
मीडिया में महिलाओं का वर्चस्व
बचपन की यादों में उड़ते रूई के फाहे
हँसी की चिट्ठी आई है !
यादों में महकती फलों की सुगंध
वह चुपचाप सिरहाने फूल रख जाता है
आदिम आत्मा की वर्णमाला के आलोकित अक्षर
बादलों की छाँव में 'बादलों' को सुनना
जिंदगी से बेदखल पसीने की गंध
पिल्ला सड़क पार कर चुका था
गुनहगार तो बच्चा था, बाकी सब बरी थे
धूप एक खूबसूरत जादूगरनी है
वह आँगन नहीं, धूप नहीं
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