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संगत
चाँदनी की रश्मियों से चित्रित छायाएँ
बस इतनी ही है कहानी
अचेतन की आकृतियाँ
मेरी आँखों में ठहरी हुई तुम
मनुष्य की सोच में ब्रह्मांड आ गया
सब कुछ अपरिचय से घिरा है
जीवन से बड़ी नहीं हो सकती है रचना
इस बार नहीं गाऊँगा गीत पीड़ा भुला देने वाले
खिड़की खुलती है पर कोई झाँकता नहीं
बारिश में भीगते पेड़ के साथ
हम सबमें अपना शहर धड़कता है
अंतर की अतल गहराइयों को जान पाते हैं?
झुरमुट में प्रतीक्षा करती गेंद
वह बारिश है, अनंत बारिश
वह तो हरे रंग की जादूगरनी है !
बारिश गिरो ना,बिना प्यार की गई स्त्री पर
जड़त्व एक रूप लिए होता है
मेरे अरमानों की कसक नीली है
हौले हौले हो जाएगा प्यार ...
कुछ कम रोशन है रोशनी, कुछ कम गीली हैं बारिशें
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